धर्म
शीतला सप्तमी आज, संतान सुख और परिवार की खुशहाली के लिए आजमाएं ये आसान टोटके
हिंदू धर्म में शीतला सप्तमी का बहुत खास महत्व है. माता शीतला को स्वास्थ्य और आरोग्य की देवी माना जाता है. मान्यता है कि उनकी विधि-विधान से पूजा करने पर न सिर्फ बीमारियां दूर भगती हैं, बल्कि संतान सुख से जुड़ी हर तरह की मुश्किलें भी आसानी से दूर हो जाती हैं.
कुंडली में सूर्य की दशा है कमजोर? रविवार को करे ये कुछ उपाय , चमक उठेगी किस्मत और सफलता आएगी दौड़कर!
कुंडली में अगर सूर्य कमजोर हो, तो सेहत ढीली पड़ने लगती है, आत्मविश्वास डगमगाता है, पिता से रिश्ते में कड़वाहट आती है और करियर में एक के बाद एक रुकावटें खड़ी हो जाती हैं. लेकिन अच्छी बात ये है कि रविवार को कुछ आसान और खास उपाय करके सूर्य को मजबूत बनाया जा सकता है.
रसोई में जूते पहनने से नाराज होती हैं मां अन्नपूर्णा? घर में बढ़ सकती है आर्थिक परेशानी... जानें वास्तु नियम
वास्तु शास्त्र के अनुसार रसोई घर को बेहद पवित्र स्थान माना जाता है, जहां माँ अन्नपूर्णा का वास होता है. ऐसे में जूते-चप्पल पहनकर किचन में जाना न केवल अशुभ माना जाता है बल्कि इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा भी बढ़ सकती है.
हिंदू नववर्ष 2026 का काउंटडाउन, 19 मार्च से रौद्र संवत की शुरुआत, क्या कहते हैं ज्योतिष संकेत?
19 मार्च 2026 से हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2083 की शुरुआत होगी, जिसका नाम ‘रौद्र’ संवत रखा गया है. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यह साल वैश्विक तनाव, प्राकृतिक चुनौतियों और आर्थिक उतार-चढ़ाव का संकेत दे सकता है.
Holi 2026: भारत के इन गांवों में नहीं खेली जाती होली, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान
जहां पूरा देश होली के रंगों में सराबोर रहता है, वहीं उत्तराखंड, झारखंड और गुजरात के कुछ गांवों में वर्षों से यह त्योहार नहीं मनाया जाता. धार्मिक मान्यताओं, श्राप और परंपराओं के कारण यहां होली के दिन सन्नाटा छाया रहता है.
महाभारत से मुगल दरबार तक, कैसे विकसित हुई होली की परंपरा?
होली की परंपरा वैदिक युग, महाभारत और वसंतोत्सव से जुड़ी प्राचीन सांस्कृतिक धारा से विकसित होकर आज के रंगों वाले उत्सव में बदली है. मुगल काल से लेकर भक्ति और सूफी परंपरा तक यह पर्व भारतीय समाज में प्रेम, उल्लास और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बनकर कायम रहा है.
होली का खास त्योहार आज, जानिए रंगों का महत्व और रंग खेलने का सही समय
होली मौसम परिवर्तन का उत्सव है, जो रंगों, मेल-मिलाप और सकारात्मक ऊर्जा के जरिए मन की नकारात्मकता दूर करने का संदेश देता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह पर्व भगवान शिव और कृष्ण से जुड़ा है तथा आस्था और उल्लास का प्रतीक माना जाता है.